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विभाग तेरावा : घ - जलपैगुरी

चित्रकाव्य — चित्रालंकाराचें लक्षण काव्यप्रकाशांत, ''तच्चिंत्र यंत्र वर्णानां खड्गाद्याकृति हेतुता'' म्हणजे जेथें वर्णरचनेच्या योगानें खड्गादिक पदार्थांच्या आकृती साधल्या असतात तेथें चित्रनामक अलंकार होतो, असें केलें आहे. त्यांत जरी आकृति साधण्याचा उल्लेख आहे तरी अलंकारशास्त्राच्या कित्येक ग्रंथांत ह्या अलंकारांचे जे पोटभेद केले आहेत त्यांत स्वरचित्र, गतिचित्र, कूटें, अंतर्लापिका, बहिलार्पिका, प्रहेलिका, इत्यादिक अनेक प्रकारच्या शब्दप्रधान काव्यांचा समावेश केलेला दिसतो. त्यामुळें ह्या अलंकाराचा इतका मोठा विस्तार झाला आहे कीं त्यास चित्रकाव्य ही एक स्वतंत्र संज्त्रा प्राप्‍त होऊन तो एक स्वतंत्र ग्रंथाचा विषय झाला, आणि संस्कृत भाषेंत चित्रकाव्यावर अनेक स्वतंत्र ग्रंथहि लिहिले गेले.

चित्रकाव्याची प्रवृति कधींपासून झाली ह्याविषयीं विचार करितां असें दिसतें कीं, संस्कृत भाषेंतील आद्यकवि जो वाल्मिकी, त्यानें रामायण महाकाव्यांत कांहीं नियमित अध्यायांच्या आरंभीच्या अक्षरांत गायत्रिमंत्राचा बंध साधला आहे. (?) व्यासानें अग्निपुराणांत चित्रकाव्यांचें चांगलें विस्तारपूर्वक वर्णन केलें आहे. श्रीमत्भागवतांतील गोपीगीतांत एक गुणबंध साधला आहे. बौद्धकालांत वाग्भट यानें आपल्या वाग्भटालंकार या ग्रंथांत चित्रकाव्यांचीं लक्षणें दिलीं आहेत. त्याचप्रमाणें दंडीच्या काव्यादर्शांत व भोजकृती सरस्वती कंठाभरणांतहि अनेक प्रकारें चित्रकाव्याचें वर्णन केलें आहे. दंडीनें दशकुमारचरितांत ७ वा उछ्वास निरोष्ठ साधला आहे. भारवीच्या किरातार्जुनीय काव्यांत, तसेंच माघाच्या शिशुपालवघ काव्यांत, कालीदासाच्या रघुवंश काव्यांत, वेंकटाध्वरीच्या 'लक्ष्मीसहस्त्र' काव्यांत त्या त्या कवींनीं चित्रकाव्याचे कित्येक प्रकार घातले आहेत व या नंतरच्या कवींनीं तर रामकृष्ण विलोमकाव्य, राघवपांडवीय काव्य इत्यादि चित्रकाव्याचे स्वतंत्रच ग्रंथ केले आहेत.

मराठी भाषेंत चित्रकाव्याचा प्रवेश करविणारा आद्यकवि म्हटला म्हणजे विठ्ठलकवि हा होय. त्यानें 'रुक्मणीस्वयंवर' नामक काव्यांत अनेक बंध साधले असून शिवाय 'षण्मासिंचा वायदा' या नांवाची अनेक कूटें व प्रहेलिका प्रसिद्ध आहेत. त्यानंतर मोरोपंतानें मंत्ररामायण, नामगर्भरामायण, सीतारामायण, परंतुरामायण, निरोष्ठरामायण इत्यादिक चित्रकाव्याचे अनेक ग्रंथ लिहिले आहेत. अलीकडच्या काळांत पाळंदे, गोडबोले, इत्यादि कवींनीं चित्रकाव्याचे कांहीं प्रकार आपल्या कवितेंत आणिले असून, बजाबा बाळाजी नेने ह्यांनीं तर आपल्या सैरंध्री नाटकांत चित्रकाव्याचे बहुतेक सर्व प्रकार साधले आहेत.

चित्रकाव्याचे शब्दचित्र आणि अर्थचित्र असे दोन भेद आहेत. कोणी उभयचित्र असा आणखी एक तिसराहि भेद मानितात.  शब्दचित्र म्हणजे ज्यांत वर्ण, मात्रा, स्थान, गति इत्यादिकांच्या संबंधानें कोणत्या तरी रीतीनें रसिक जनांस आल्हाद देणारा असा चमत्कार केला असतो, अशी जी काव्यरचना तें शब्दचित्र होय. ह्याचे साधारण ६ भेद आहेत ते असे:—

१ स्वरचित्र, २ वणचित्र, ३ स्थानचित्र, ४ आकारचित्र, ५ गतिचित्र, आणि ६ बंधचित्र. गतिचित्रांत विशिष्ट गतीच्या धोरणानें वर्णरचना करून चमत्कार दाखविण्यांत येतो; उदा. गोमूत्र-गतिचित्र-घ्या.

गाय बैल हे चालत असतां मुतूं लागले तर त्यांची भूमीवर जशी रेषा उमटते, त्याप्रमाणें जेथें वर्णरचना केली असते तेथें हें चित्र होतें. पुढील श्लोक याप्रमाणें रचितात:—

कमले देवदेवस्य महिषिस्त्वं स्तुतारमे
विमले देविदेहस्य ह्यहिमंत्वं नतास्यमे.

बंधचित्रांत वर्ण रचनेच्या योगानें एखाद्या पदार्थांची आकृति साधलेली असते किंवा कांहीं सार्थ अक्षरें व व्यक्तिनामें साधलीं असतात. यांत आकृतिबंध व गुणबंध असे दोन भेद आहेत. चतुर्दलपद्मबंध, अष्टदलपद्मबंध, चक्रबंध, छत्रबंध वगैरे बंधचित्रांतील प्रकार होत.

अर्थचित्रांत अर्थरचनेचा चमत्कार दृष्टीस पडतो. प्रश्नोत्तर एकानेकोत्तर -गूढ-कूट चित्र, हे प्रकार या चित्रकाव्यांत समाविष्ट होतात. तसेंच प्रहेलिका, अंतर्लापिका, बहिर्लापिका, अपन्हुती, पदगुप्‍त, क्रियागुप्‍त, कर्तृगुप्‍त, मात्राच्युतक, अक्षरच्युतक, च्युतदत्ताक्षरा हेहि काव्यप्रकार चित्रकाव्यांतलेच होत. त्यांची उदाहरणें सुभाषितरत्‍नभांडागारम् सारख्या ग्रंथांत पहावयास मिळतील. [वि. विस्तार पु. ४४ व ४५].

   

खंड १३ : घ - जलपैगुरी  

 

 

 

  घंटय्याकवि
  घटोत्कच
  घटोत्कच लेणीं
  घड्याळ
  घनी
  घनौर
  घांट
  घाटगे
  घाटाळ
  घातमपूर
  घानची
  घायपात
  घारगड किल्ला
  घारघोडा
  घारापुरी
  घाशीराम कोतवाल
  घांसदाणा
  घासी
  घिरथ
  घिसाडी
  घुगुस
  घुंड
  घुबड
  घुराम
  घेरिया
  घेवडा
  घोटकी
  घोडबंदर
  घोडा
  घोडाघांट
  घोडाबारी
  घोडासर
  घोडें
  घोडेघांस
  घोरपड
  घोरपडी
  घोरपडे
  घोरी घराणें
  घोशी
  घोसाळे
  घोसी
  घोळ
 
 
  चउमू
  चकमा
  चकला रोषनाबाद
  चकवाल
  चकिया
  चक्कियर
  चक्कीनोआरो
  चक्रपाणि
  चक्रवर्ती
  चक्राप्पा
  चंगनाचेरी
  चंगर
  चच, चचनामा
  चचान
  चटया
  चडार
  चंडी
  चतुरमहाल
  चतुर साबाजी
  चतुरसिंग
  चतुर्थ
  चत्रा
  चॅथॅम
  चंदगड
  चंद घराणे
  चंदन
  चंदभाट
  चंदरभान
  चंदावरकर, नारायण गणेश
  चंदासाहेब
  चंदीपुर
  चंदेरी
  चंदेल्ल
  चंदौली
  चंदौसी
  चंद्र
  चंद्रकोना
  चंद्रगिरी
  चंद्रगुप्त
  चंद्रगोमिन्
  चंद्रनगर
  चंद्रभागा
  चंद्रहास
  चंद्रावती अथवा चंद्रावली
  चन्नगिरी
  चन्नपट्टण
  चन्नबसव
  चन्नरायपट्टण
  चंपा
  चंपानेर
  चपारण
  चंपावत
  चंपाषष्ठी
  चंबळा नदी
  चबा संस्थान
  चमारडी
  चरक
  चरखा
  चरखारी
  चरणदासी
  चरणव्यूह
  चरबी
  चरबीचें झाड
  चरी
  चर्मण्वती
  चलत-चित्रें
  चलन
  चल्लाकेरे
  चवळी
  चहा
  चक्षुर्मंनु
  चाकण
  चाकवत
  चागई
  चांगदेव
  चांगभकार
  चांगा केशवदास
  चाघताइखान
  चांचेगिरी
  चाचो
  चांडोद
  चाणक्य
  चातुर्मास्य
  चातुर्मास्य याग
  चातुर्वर्ण्य
  चात्सु
  चादचा
  चांदपूर
  चांदबिबी
  चांदभाट
  चांदला
  चांदवड
  चांदा
  चांदूर
  चांदूर बाजार
  चांद्रायण
  चानन शानन
  चानस्मा
  चानाल
  चानोड
  चाप्रा
  चाफळ
  चाबुआ
  चांभार
  चाम
  चामखीळ
  चामन
  चामराजनगर
  चामुंड
  चामुर्शी
  चार
  चारखा
  चारण
  चारदुआरं
  चारसद
  चारा
  चारीकार
  चार्टिझम
  चार्लंमांट, अर्ल ऑफ
  चार्वाक
  चालुक्य घराणें
  चालसिस
  चावडा
  चावंद
  चास-कमान
  चॉसर
  चासा
  चाहमान उर्फ चौहान
  चाळिसगांव
  चिक
  चिकंजी
  चिकबळ्ळापूर
  चिकाकोल
  चिकोडी
  चिक्कणर्ति
  चिक्केरूर
  चिक्टीआबर
  चिक्नायकन्हळ्ळी
  चिक्मगळूर
  चिखलदरा
  चिखली
  चिंगलपट
  चिंच
  चिचगड, जमीनदारी
  चिंचलीगदड
  चिंचवड
  चिचेवाडा
  चिंचौली
  चिंच्यु
  चिटणीस
  चितलनगर जमीनदारी
  चितळ
  चितळदुर्ग
  चिताकुल
  चिंतामणी
  चिंतामणी कवि
  चिंतामणी रघुनाथाचार्य
  चितारी
  चिति
  चितोड
  चित्तगांग
  चित्तगांग डोंगराळ प्रदेश
  चित्ता
  चित्तूर
  चित्फिरोझपूर
  चित्रकला
  चित्रकाव्य
  चित्रकूट
  चित्रकोट
  चित्रगुप्त
  चित्ररथ
  चित्रसंग्रहालयें
  चित्रळ
  चित्रांगदा
  चित्रावाव
  चिदंबर दीक्षित
  चिदंबरम्
  चिंदविन
  चिंदविन नदी
  चिदानंद स्वामी
  चिनडोंगर
  चिनमुलगुंद
  चिन लोक
  चिनसुरा
  चिनाब
  चिनीमाती किंवा केओलिन
  चिन्नविरन्ना
  चिन्नूर
  चिन्योत
  चिपळूण
  चिपळूणकर, कृष्णशास्त्री
  चिपळूणकर, विष्णुशास्त्री
  चिफू
  चिमणाजीआप्पा
  चिमणाजी दामोदर
  चिमणी
  चिरक्कल
  चिराबा
  चिलखत-वेदकालांतहि
  चिलिअनवाला
  चिली
  चिल्का सरोवर
  चिस्ती
  चीझी, अॅंटोनें लिओनार्ड डि
  चीन
  चीनी
  चीपुरुपल्ले
  चीर
  चीराल
  चुका
  चुकचि
  चुटिया
  चुडा
  चुडा संस्थान
  चुडेश्वर
  चुना
  चुनार
  चुंबकजन्य विद्युद्यंत्र
  चुंबकत्व
  चुंबकीय दृकशास्त्र
  चुंबन
  चुमल्हारी
  चुरू
  चूडामण
  चेकोस्लोव्हेकिया
  चेंगीझखान
  चेचेंझे
  चेटवई
  चेट्टी
  चेदूब बेट
  चेंबर्स रॉबर्ट
  चेयूर
  चेर घराणें
  चेरात
  चेरापुंजी
  चेरिअल
  चेरुमन
  चेरो
  चेर्रा
  चेल
  चेसेलडेन, विल्यम
  चेस्टरफील्ड
  चेस्टरफील्ड फिलिफ
  चैतन्य
  चैतसिंग
  चैत्य
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