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अक्षरानुक्रम (Alphabetical)

   

विभाग विसावा : वऱ्हाड - साचिन

वैशेषिक:- शड्दर्शनांपैकीं एक दर्शन. न्यायदर्शनाशी याचें पुष्कळच साम्य असल्यानें या दोहोंचा नेहमीं एकत्र उल्लेख येतो. आणि या जोडीपैकीं वैशेषिक दर्शन हें अगोदरचें असून याचा कर्ता कणाद आहे (कणाद पहा.) यावा रचनाकाल इ.स. २०० ते ४०० च्या दरम्यान असावा असें विद्वानांचें मत आहे. 'विशेष' नांवाचा एक नवीनच पदार्थ मानून त्याला कणादानें विशेष महत्त्व दिल्यामुळें या दर्शनाला 'वैशेषिक दर्शन' असें नांव पडलें आहे. या दर्शनाचे एकंदर दहा अध्याय असून प्रत्येक अध्यायाची दोन आन्हिकें आहेत, व एकंदर सूत्रें ३७० आहेत. पहिल्या अध्यायांत जातीचें व जातीविशेषांचें विवेचन; दुसर्‍या अध्यायांत यांचीं लक्षणें; तिसर्‍या अध्यायांत आत्मा व अंत:करण यांची लक्षणें; चौथ्या अध्यायांत शरीर व तदुपयोगी यांचें वर्णन; पांचव्या अध्यायांत कर्मप्रतिपादन; सहाव्या अध्यायांत श्रौतधर्म निरूपण; सातव्या अध्यायांत गुणसमवाय प्रतिपादन; आठव्या अध्यायांत ज्ञानोत्पत्ति त्याचें निदान एतद्विशयक निरूपण; नवव्यांत बुध्दिविशेषांचें प्रतिपादन व दहाव्यांत आत्म्याच्या मुख्य गुणांचे भेद विषद करून दाखविले आहेत. तात्पर्य विश्वातील सर्व पदार्थाचें द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, व समवाय हे सहा वर्ग केले आहेत. याशिवाय काहीं वैशेषिक पंडितांनीं अभाव हा सातवा पदार्थ मानला आहे. द्रव्याचे पृथ्वी, आप, तेज, वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा व मन असे नऊ पोटभाग आहेत. गुण चोवीस प्रकारचे आहेत. कर्माचे उत्क्षेपणापक्षेपणादि पांच प्रकार आहेत. सामान्याचे पर व अपर असे दोन प्रकार असून सत्ता ही परसामान्य व जाति ही अपरसामान्य असते. विशेष हे अनंत आहेत. समवाय हा एकच व अभेद्य आहे. तथापि त्याचे अवयव व अवयवी, गुण व गुणी, जाति, व्यक्ति इत्यादि प्रकार आहेत. त्याशिवाय द्रव्यांचे परमाणू असतात ही कल्पना काढण्याचें श्रेयहि कणादाकडेच आहे. परमाणुवादाची कल्पना अशी:- द्रव्याचे भाग पडत गेल्यास शेवटीं ते भाग परमाणूपर्यंत होत जातील. परमाणूपेक्षां दुसरा सूक्ष्म भाग पडत नाहीं. परमाणू हे इंद्रियगोचर, स्वतंत्र, नित्य असून त्यांनां जाति नाहीं. दोन परमाणू एकत्र आले असतां त्याचे ह्यणूक बनतात. अशा तीन ह्यणूकांच्या संयोगानें त्र्यणूक होतात व अशा रीतीनें सृष्टी निर्माण होते. पदार्थांच्या गुणांत जे बाह्य कारणाने विकार होतात ते एकंदर सर्व पदार्थात होत नसून, पदार्थाचे मूळचे गुण नष्ट होऊन त्या जागीं पाकामुळें दुसरे गुण येतात असें यांचें मत आहे व त्यामळें वैशेषिकांनां 'पीलुपाकवादी' म्हणतात. पीलुपाक म्हणजे अणूंचा पाक होय. यांच्याविरूध्द नैयायिकांचा पिठरपाक म्हणजे अणूंनीं बनलेल्या सर्व वस्तूंचा पाक होय.

वैशेषिकांचा मुख्य भर अणुवादावर आहे पण तो पुढें सांख्यांनीं व वेदांत्यांनीं खोडून टाकला आहे. वैशेषिकांच्या मतानें मन हें अणु असून त्याचा आत्म्याशी संयोग झाला असतां ज्ञानप्रतीति होते. मन हें आत्मा व इंद्रियें यांचा दुवा होय पण हाहि सिध्दान्त वेदांत्यांनीं सप्रमाण खोडून टाकला आहे.

वात्स्यायनाचें भाष्य, विश्वनाथाची वृत्ति, तर्कभाषा, तर्कसंग्रह, सत्पदार्थी इत्यादि अनेक लहानमोठे ग्रंथ या दर्शनावर झाले आहेत. [सर्वर्शनसंग्रह; लेले-- प्रस्थानभेद; मॅक्समुल्लर--सिक्स सिस्टिम्स ऑफ इंडियन फिलॉसफी.]

   

खंड २० : व-हाड - सांचिन  

 

 

 

  वलवनाड
  वल संस्थान
  वल्लभाचार्य
  वल्लभीचा मैत्रकवंश
  वल्लभ्
  वसई
  वसिष्ठ
  वसु
  वसुदेव
  वहना
  वहाबी
  वक्षनिदान
  वाई
  वाकाटक राजे
  वांकानेर संस्थान
  वांगारा
  वांग
  वाग्भट्ट
  वाघ
  वाघरी
  वाघांटी
  वाघेल राजे
  वाघोलीकर, मोरो बापूजी
  वाघ्या
  वाघ्रा
  वाचनालयें
  वाचस्पतिमिश्र
  वाचाभंग
  वांटप
  वाटल
  वाटाणा
  वाडाइ
  वाडें
  वाणी
  वात
  वात्स्यायन
  वांदिवाश
  वाद्यें
  वांद्रें
  वांबोरी
  वामदेव
  वामन
  वामन पंडित
  वामनस्थळी
  वायनाड
  वायलपाद
  वायव्य सरहद्द प्रांत
  वायुपुराण
  वायुभारमापक
  वायूचे रोग
  वारकरी पंथ
  वारली
  वारसा
  वार्सा शहर
  वालखिल्य
  वालपापडी
  वालपोल, होरेशिओ
  वालरस
  वालाजापेट
  वाली
  वाल्मिकि
  वाल्हें
  वाशिंग्टन
  वॉशिंग्टन, जॉर्ज
  वॉशिंग्टन, बुकर टी
  वाशिम
  वासवा
  वा संस्थानें
  वासुकि
  वासुदेव
  वासोटा
  वास्तुसौंदर्यशास्त्र
  वाहीक
  वाळवें
  वाळा
  विकर्ण
  विक्रमपूर
  विक्रमसंवत् व विक्रमादित्य
  विंचावड
  विचित्रवीर्य
  विंचू
  विंचूर
  विंचेस्टर
  विजयगच्छ
  विजयदुर्ग
  विजयादशमी
  विजयानगर
  विजयानगरचें घराणें
  विजयानगरम्
  विजापूर
  विझगापट्टम्
  विटेनबर्ग
  विठ्ठल कवी
  विठ्ठल शिवदेव विंचूरकर
  विठ्ठल सुंदर परशरामी
  विंडबर्ड बेटे
  विंडसर
  विणकाम अथवा विणणें
  वित्तेश्वर
  विदुर
  विदुला
  विदेह
  विद्याधर
  विद्यापीठें
  विद्युत्
  विंध्यपर्वत
  विनायकी लिपी
  विनुकोंडा
  विमा
  विमान
  विरपुर
  विरमगांव
  विरवन्नलूर
  विराट
  विल्यम राजे
  विल्यम्स, सर मोनीयर
  विल्लुपुरसम्
  विल्यन वुड्रो
  विल्सन, होरेस हेमन
  विल्हेल्म्स हॅवन
  विवस्वान्
  विवाह
  विवेकानंद
  विशाळगड किल्ला
  विशाळगड संस्थान
  विशिष्टाद्वैत
  विश्वकर्मा
  विश्वनाथ
  विश्वब्राह्मण
  विश्वसंस्था
  विश्वामित्र
  विश्वासराव पेशवे
  विश्वेदेव
  विश्वोत्पत्ति
  विश्वोत्पत्ति
  विषें व विषबाधा
  विष्णु
  विष्णु गोविंद विजापूरकर
  विष्णुदास नामा
  विष्णुपुराण
  विष्णुस्मृति
  विसनगर
  विसोबाखेचर
  विज्ञानशास्त्र
  विज्ञानेश्वर
  वीरपूर
  वीरवल्ली
  वीरशैव उर्फ लिंगायत
  वीरावळ
  वूलर सरोवर
  वूलवरहॅस्टन
  वूलिच
  वृत्तपत्रें
  वृत्तें
  वृत्र
  वृन्दसंगीत
  वृंदावन
  वृद्धाचलम्
  वृक्षसंवर्धन
  वेंगी देश
  वेंगुर्लें
  वेणूबाई
  वेत
  वेद
  वेदांत
  वेदारण्यम्
  वेद्द
  वेधशास्त्र
  वेरुळ
  वेलदोडे
  वेलन
  वेलबोंडी
  वेलस्टी रिचर्ड कॉली, मार्किंस
  वेलिंग्टन
  वेलिंग्टन, आर्थंर वेलस्ली
  वेल्लाळ
  वेल्लोर
  वेल्स
  वेश्याव्यवसाय
  वेस्टइंडिज बेटें
  वेस्ले, जॉन
  वैतरणी
  वैदु
  वैराट
  वैवस्वत मनु
  वैशंपायन
  वैशाली-विशाल
  वैशेषिक
  वैश्य
  वैष्णव संप्रदाय
  व्यंकटगिरी
  व्यंकटाध्वरी
  व्यंकोजी
  व्यापार
  व्यायाम
  व्रत
  व्हर्जिन बेटें
  व्हर्जिल
  व्हल्कन
  व्हिएन्ना
  व्हिक्टोरिया
  व्हिक्टोरिया निआंझा
  व्हिक्टोरिया फॉल
  व्हिलिंजस्
  व्हेनिस्
  व्हेनेझुएला
  व्हेपिन
  व्हेसुव्हियस
  व्होल्टा अल्सान्ड्रो
  व्होल्टेअर
 
  शक
  शंकराचार्य
  शंकुतला
  शकुनि
  शक्तिसंस्थान
  शंतनु
  शत्रुघ्न
  शनि
  शब्दवाहक
  शरीरसंवर्धन
  शर्मिष्ठा
  शल्य
  शस्त्रवैद्यक
  शहाजहान
  शहाजी
  शहामृग
  शाई
  शांघाय
  शांतीपूर
  शान
  शारीर व इंद्रियविज्ञानशास्त्र
  शारीरांत्र गूहकसंघ
  शार्लमन चार्लस दि ग्रेट
  शालिवाहन राजे
  शालिवाहन शक
  शासनशास्त्र
  शाहू थोरला
  शिकॅगो
  शिखंडी
  शिंगाडा
  शिगात्झे
  शिंदे घराणें
  शिंपी
  शिबि
  शिरपुर
  शिर:शोणित मूर्च्छा
  शिराझ
  शिरूर
  शिरोंचा
  शिलर, जोहान ख्रिस्तोप
  शिलाजित
  शिलाहार राजे
  शिल्पकला
  शिव
  शिवगंगा
  शिवगिरि
  शिवदीनबावा
  शिवाजी
  शिशुपाल
  शिसें
  शिक्षणशास्त्र
  शीख
  शुक
  शुक्र
  शुंग घराणें
  शुजा
  शुन:शेप
  शुंभ निशुंभ
  शुश्रूषा
  शूर्पणखा
  शूलगव
  शृंगवरप्पुकोटा
  शृंगेरी
  शेक्सपिअर विल्यम्
  शेख
  शेखमहंमद
  शेख सादी
  शेगांव
  शेडबाळ
  शेफिल्ड
  शेले, पर्सी बायशे
  शेष
  शेळ्यामेंढ्या
  शैवसंप्रदाय
  शोण अथवा शोणभद्रा
  शोपेनहार
  श्रवणबेळगोळ
  श्रीधरस्वामी
  श्रीनगर
  श्रीरंगम्
  श्रीविल्लीपुत्तूर
  श्रीवैकुंठम्
  श्रीशैलम्
  श्लीपदरोग
  श्लेगेल
  श्वासनलिकादाह
  श्वेतांबर जैन
  श्वेताश्वतरोपनिषद
 
 
  संकटकतनु
  संकरनाइनार्कोयिल
  संकेश्वर
  सक्कर
  सखारामबापू
  संख्यामीमांसा
  संग
  संगड
  संगमनेर
  संगमेश्वर
  सगर
  संगीतशास्त्र
  संग्रहणी
  संघड
  संघसत्तावाद
  सच्छिद्रसंघ
  संजय
  संजारी
  सतलज
  संताळ परगणे
  सती
  सत्नामी
  सत्पंथ
  सत्यभामा
  सत्यवान
  संत्री-मोसंबी
  सदानंद
  सदाशिव माणकेश्वर
  सदाशिवरावभाऊ पेशवे
  संदिला
  संदोवे
  संद्वीप
  संधिपाद
  संधिवातरोग
  सॅन फ्रान्सिको
  सन्निपातज्वर
  संपगांव
  संपथर
  संपात
  संपातचलन
  सपृष्ठवंश
  सप्तशृंगी
  सफीपूर
  संबलपूर
  संभळ
  संभाजी
  संभाजी आंगरे
  समरकंद
  समशेर बहादूर
  समाजशास्त्र
  समाजसत्तावाद
  समीकरणमीमांसा
  समुंद्री
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  सम्राला
  सयाम
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