प्रस्तावना खंड  

   

सूची खंड  

   
Banners
   

अक्षरानुक्रम (Alphabetical)

   

विभाग विसावा : वऱ्हाड - साचिन    

साक्रेटीस- हा ग्रीक तत्त्ववेत्ता ख्रि. पू. ४७१ च्या सुमारास जन्मला. लहानपणीं याला ग्रीक पद्धतीप्रमाणें संगीताचें व शारीरिक शिक्षण मिळालें होतें. पुढें त्यानें भूमिति व ज्योतिष या विषयांचा अभ्यास केला व ग्रीक विचार व संस्कृति याविषयीं माहिती मिळविली. तथापि प्रथम त्यानें शिल्पकाराचा धंदा सुरू केला. पण लवकरच तो सोडून देऊन त्यानें लोकशिक्षणाचा उपयोग आरंभिला. हें शिक्षण म्हणजे लोकांचें अज्ञान व चुकीच्या कल्पना त्यांच्या निदर्शनास आणून देणें व अशा रीतीनें त्यांची बौद्धिक व नैतिक सुधारणा करणें. या रीतीनें त्या वेळच्या अथेन्समधील बहुतेक प्रसिद्ध लोकांशीं साक्रेटीसचा परिचय झाला. साक्रे‍टीसला प्रापंचिक सुख लाभलें नाहीं. त्याची पहिली बायको झाटिपी हिच्या कजागपणाची अजूनहि लोकांत प्रसिद्धि आहे. साक्रेटिसाचे मुलगे निर्बुद्ध निघाले असें अरिस्टॉटलनें म्हटलें आहे. साक्रेटीस लढाईवरहि गेला होता, तेव्हां त्याचें शौर्य व काटकपणा हीं लोकांच्या चांगलीं निदर्शनास आलीं. ख्रि. पू. ४०६ सालीं तो सीनेटचा सभासद झाला, पण त्याचें व अधिकारारूढ पक्षाचें कधींच पटलें नाहीं. जरूर तेव्हां अधिका-याच्या कृत्याचा तो स्पष्टपणें निषेध करीत असे, यामुळें त्याच्यामध्यें द्वेषाग्नि धुमसत राहून शेवटीं ख्रि. पू. ३९९ मध्यें त्यानें पेट घेतला, आणि राजदैवताबद्दल नास्तिक्यबुद्धि, नवदैवतांचीं प्रस्थापना आणि तरुणांचा बुद्धिभेद करणें हे आरोप ठेवून त्याच्यावर खटला करण्यांत आला. त्यामध्यें साक्रेटीसनें आपल्या बचावाच्या भाषणांत माफी न मागतां उलट न्यायाधिशांचा उघड धिःकार केला. त्यामुळें न्यायाधिशांनीं आरोप शाबीत धरून त्यास मरणाची शिक्षा फर्माविली. तथापि साक्रेटीस स्थितप्रज्ञाप्रमाणें शांतवृत्तीनें शेवटपर्यंत आपलींच मतें प्रतिपादन करीत विष पिऊन मरण पावला.

साक्रेटीस दिसण्यात कुरूप व वेडगळच दिसे. तथापि अन्तःकरणांत देवाबद्दल पूर्ण श्रद्धा ठेवून कोणाहि मनुष्यमात्रास पीडा न करतां सतत सन्मार्गानें चालत असल्यामुळें साक्रेटीसचें आयुष्य उत्तम सुखासमाधानानें गेलें. त्याच्या अंगीं असामान्य इंद्रियनिग्रह व सोशिकपणा होता.

नैतिक सद्गुणांप्रमाणेंच त्याचें बुद्धिसामर्थ्यहि अलौकिक होतें. सद्‍सन्निर्णयबुद्धि हा त्याच्यां नैतिक आचरणाचा पाया होता; आणि स्वतःच्या प्रत्यक्ष आचरणाबरोबरच संभाषणानें त्यानें अनेक लोकरूढींविरुद्ध आपलीं मतें लोकांत प्रस्थापित केलीं. साक्रेटीस खरा देशभक्त होता, आणि स्वतःच्या जन्मभूमींतील लोकांनां नैतिक व राजकीय उच्च तत्त्वांचा उपदेश करणें, हें तो आपलें कर्तव्य समजे. स्वतःची दृष्टि अथेन्सपुरतीच आकुंचित न ठेवतां तो जगन्मित्राप्रमाणें सर्वांशीं स्नेहभावानें आणि उदारपणानें वागे. तसेंच तो अत्यंत विनोदी होता. आणि औपरोधिक भाषणें व व्याजस्तुति यांत तर त्याचा अगदीं हातखंडा असे. स्वतः अत्यंत हुषार, विचारी नीतिशुद्ध असूनहि तो अज्ञानीपणाचें वेड पांघरून सर्व दर्जाच्या व प्रकारच्या लोकांत तो मिसळत असे, व त्यांनां सुधारण्याचा प्रयत्न करी. साक्रेटीसाची धर्मश्रद्धाहि उज्वल होती तथापि तत्कालीन अनेकेश्वरी मत त्याला मान्य नसून तो पक्का एकेश्वरवादी होता, आणि तो धर्माचरण व प्रार्थना नियमित करीत असे. आत्म्याच्या अमरत्वावरहि त्याची श्रद्धा होती.

   

खंड २० : व-हाड - सांचिन  

 

 

 

  वलवनाड
  वल संस्थान
  वल्लभाचार्य
  वल्लभीचा मैत्रकवंश
  वल्लभ्
  वसई
  वसिष्ठ
  वसु
  वसुदेव
  वहना
  वहाबी
  वक्षनिदान
  वाई
  वाकाटक राजे
  वांकानेर संस्थान
  वांगारा
  वांग
  वाग्भट्ट
  वाघ
  वाघरी
  वाघांटी
  वाघेल राजे
  वाघोलीकर, मोरो बापूजी
  वाघ्या
  वाघ्रा
  वाचनालयें
  वाचस्पतिमिश्र
  वाचाभंग
  वांटप
  वाटल
  वाटाणा
  वाडाइ
  वाडें
  वाणी
  वात
  वात्स्यायन
  वांदिवाश
  वाद्यें
  वांद्रें
  वांबोरी
  वामदेव
  वामन
  वामन पंडित
  वामनस्थळी
  वायनाड
  वायलपाद
  वायव्य सरहद्द प्रांत
  वायुपुराण
  वायुभारमापक
  वायूचे रोग
  वारकरी पंथ
  वारली
  वारसा
  वार्सा शहर
  वालखिल्य
  वालपापडी
  वालपोल, होरेशिओ
  वालरस
  वालाजापेट
  वाली
  वाल्मिकि
  वाल्हें
  वाशिंग्टन
  वॉशिंग्टन, जॉर्ज
  वॉशिंग्टन, बुकर टी
  वाशिम
  वासवा
  वा संस्थानें
  वासुकि
  वासुदेव
  वासोटा
  वास्तुसौंदर्यशास्त्र
  वाहीक
  वाळवें
  वाळा
  विकर्ण
  विक्रमपूर
  विक्रमसंवत् व विक्रमादित्य
  विंचावड
  विचित्रवीर्य
  विंचू
  विंचूर
  विंचेस्टर
  विजयगच्छ
  विजयदुर्ग
  विजयादशमी
  विजयानगर
  विजयानगरचें घराणें
  विजयानगरम्
  विजापूर
  विझगापट्टम्
  विटेनबर्ग
  विठ्ठल कवी
  विठ्ठल शिवदेव विंचूरकर
  विठ्ठल सुंदर परशरामी
  विंडबर्ड बेटे
  विंडसर
  विणकाम अथवा विणणें
  वित्तेश्वर
  विदुर
  विदुला
  विदेह
  विद्याधर
  विद्यापीठें
  विद्युत्
  विंध्यपर्वत
  विनायकी लिपी
  विनुकोंडा
  विमा
  विमान
  विरपुर
  विरमगांव
  विरवन्नलूर
  विराट
  विल्यम राजे
  विल्यम्स, सर मोनीयर
  विल्लुपुरसम्
  विल्यन वुड्रो
  विल्सन, होरेस हेमन
  विल्हेल्म्स हॅवन
  विवस्वान्
  विवाह
  विवेकानंद
  विशाळगड किल्ला
  विशाळगड संस्थान
  विशिष्टाद्वैत
  विश्वकर्मा
  विश्वनाथ
  विश्वब्राह्मण
  विश्वसंस्था
  विश्वामित्र
  विश्वासराव पेशवे
  विश्वेदेव
  विश्वोत्पत्ति
  विश्वोत्पत्ति
  विषें व विषबाधा
  विष्णु
  विष्णु गोविंद विजापूरकर
  विष्णुदास नामा
  विष्णुपुराण
  विष्णुस्मृति
  विसनगर
  विसोबाखेचर
  विज्ञानशास्त्र
  विज्ञानेश्वर
  वीरपूर
  वीरवल्ली
  वीरशैव उर्फ लिंगायत
  वीरावळ
  वूलर सरोवर
  वूलवरहॅस्टन
  वूलिच
  वृत्तपत्रें
  वृत्तें
  वृत्र
  वृन्दसंगीत
  वृंदावन
  वृद्धाचलम्
  वृक्षसंवर्धन
  वेंगी देश
  वेंगुर्लें
  वेणूबाई
  वेत
  वेद
  वेदांत
  वेदारण्यम्
  वेद्द
  वेधशास्त्र
  वेरुळ
  वेलदोडे
  वेलन
  वेलबोंडी
  वेलस्टी रिचर्ड कॉली, मार्किंस
  वेलिंग्टन
  वेलिंग्टन, आर्थंर वेलस्ली
  वेल्लाळ
  वेल्लोर
  वेल्स
  वेश्याव्यवसाय
  वेस्टइंडिज बेटें
  वेस्ले, जॉन
  वैतरणी
  वैदु
  वैराट
  वैवस्वत मनु
  वैशंपायन
  वैशाली-विशाल
  वैशेषिक
  वैश्य
  वैष्णव संप्रदाय
  व्यंकटगिरी
  व्यंकटाध्वरी
  व्यंकोजी
  व्यापार
  व्यायाम
  व्रत
  व्हर्जिन बेटें
  व्हर्जिल
  व्हल्कन
  व्हिएन्ना
  व्हिक्टोरिया
  व्हिक्टोरिया निआंझा
  व्हिक्टोरिया फॉल
  व्हिलिंजस्
  व्हेनिस्
  व्हेनेझुएला
  व्हेपिन
  व्हेसुव्हियस
  व्होल्टा अल्सान्ड्रो
  व्होल्टेअर
 
  शक
  शंकराचार्य
  शंकुतला
  शकुनि
  शक्तिसंस्थान
  शंतनु
  शत्रुघ्न
  शनि
  शब्दवाहक
  शरीरसंवर्धन
  शर्मिष्ठा
  शल्य
  शस्त्रवैद्यक
  शहाजहान
  शहाजी
  शहामृग
  शाई
  शांघाय
  शांतीपूर
  शान
  शारीर व इंद्रियविज्ञानशास्त्र
  शारीरांत्र गूहकसंघ
  शार्लमन चार्लस दि ग्रेट
  शालिवाहन राजे
  शालिवाहन शक
  शासनशास्त्र
  शाहू थोरला
  शिकॅगो
  शिखंडी
  शिंगाडा
  शिगात्झे
  शिंदे घराणें
  शिंपी
  शिबि
  शिरपुर
  शिर:शोणित मूर्च्छा
  शिराझ
  शिरूर
  शिरोंचा
  शिलर, जोहान ख्रिस्तोप
  शिलाजित
  शिलाहार राजे
  शिल्पकला
  शिव
  शिवगंगा
  शिवगिरि
  शिवदीनबावा
  शिवाजी
  शिशुपाल
  शिसें
  शिक्षणशास्त्र
  शीख
  शुक
  शुक्र
  शुंग घराणें
  शुजा
  शुन:शेप
  शुंभ निशुंभ
  शुश्रूषा
  शूर्पणखा
  शूलगव
  शृंगवरप्पुकोटा
  शृंगेरी
  शेक्सपिअर विल्यम्
  शेख
  शेखमहंमद
  शेख सादी
  शेगांव
  शेडबाळ
  शेफिल्ड
  शेले, पर्सी बायशे
  शेष
  शेळ्यामेंढ्या
  शैवसंप्रदाय
  शोण अथवा शोणभद्रा
  शोपेनहार
  श्रवणबेळगोळ
  श्रीधरस्वामी
  श्रीनगर
  श्रीरंगम्
  श्रीविल्लीपुत्तूर
  श्रीवैकुंठम्
  श्रीशैलम्
  श्लीपदरोग
  श्लेगेल
  श्वासनलिकादाह
  श्वेतांबर जैन
  श्वेताश्वतरोपनिषद
 
 
  संकटकतनु
  संकरनाइनार्कोयिल
  संकेश्वर
  सक्कर
  सखारामबापू
  संख्यामीमांसा
  संग
  संगड
  संगमनेर
  संगमेश्वर
  सगर
  संगीतशास्त्र
  संग्रहणी
  संघड
  संघसत्तावाद
  सच्छिद्रसंघ
  संजय
  संजारी
  सतलज
  संताळ परगणे
  सती
  सत्नामी
  सत्पंथ
  सत्यभामा
  सत्यवान
  संत्री-मोसंबी
  सदानंद
  सदाशिव माणकेश्वर
  सदाशिवरावभाऊ पेशवे
  संदिला
  संदोवे
  संद्वीप
  संधिपाद
  संधिवातरोग
  सॅन फ्रान्सिको
  सन्निपातज्वर
  संपगांव
  संपथर
  संपात
  संपातचलन
  सपृष्ठवंश
  सप्तशृंगी
  सफीपूर
  संबलपूर
  संभळ
  संभाजी
  संभाजी आंगरे
  समरकंद
  समशेर बहादूर
  समाजशास्त्र
  समाजसत्तावाद
  समीकरणमीमांसा
  समुंद्री
  सम्पत्ति
  सम्राला
  सयाम
  संयुक्त संस्थानें
  सय्यद
  सरकेशियन लोक
  सरगोधा
  सरधन
  सरस्वती
  सरहिंद
  सरक्षक जकातपद्धति
  सरैकेला
  सर्प
  सर्वसिद्धि
  सर्वेश्वरवाद
  सर्व्हिया
  सॅलोनिका
  सवर
  संशयवाद
  ससराम
  ससा
  संस्कार
  संस्कृति
  सस्तनप्राणी
  सहकारी संस्था
  सहदेव
  सहवासी ब्राह्मण
  सहसवन
  सहारा
  सह्याद्रि
  साऊथ वेस्ट आफ्रिका
  साकारिन
  साकोली
  साक्रेटीस
  साखर
  सांख्य
  साग
  सांगला
  सांगली संस्थान
  सागैंग, जिल्हा
  सांगोलें
  साघलीन
  सांचिन

 

   

यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान निर्मित महत्वपूर्ण संकेतस्थळे  

   

पुजासॉफ्ट, मुंबई द्वारा निर्मित
कॉपीराइट © २०१२ --- यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान, मुंबई - सर्व हक्क सुरक्षित .